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गाइड Matt Connorलेखक: Matt Connor

URL और HTTP क्या है? वेब एड्रेस का हर हिस्सा समझें

वेब एड्रेस में HTTP का अर्थ और URL का हर हिस्सा, एक उदाहरण से समझिए। साथ में सीखिए कि SMS में आए लिंक का असली डोमेन दाएँ से बाएँ पढ़कर कैसे पहचानें।

URL क्या है और वेब एड्रेस में HTTP का अर्थ क्या है?

URL यानी Uniform Resource Locator, इंटरनेट पर किसी एक पेज या फ़ाइल का पूरा पता है। पते की शुरुआत में लिखे HTTP का अर्थ है Hypertext Transfer Protocol: वे नियम जिनसे आपका ब्राउज़र किसी सर्वर से पेज माँगता है। HTTPS वही बातचीत है, बस वह TLS (Transport Layer Security) से एन्क्रिप्ट होती है।

नीचे हम एक उदाहरण पता लेंगे और उसका हर हिस्सा अलग करके समझेंगे। फिर वह तरीका सीखेंगे जो रोज़ काम आता है: SMS या WhatsApp में आए किसी लिंक का असली डोमेन कैसे पहचानें। आख़िर में सरकारी पोर्टल का पता जाँचने का तरीका और एड्रेस बार के Not secure लेबल का मतलब है।

HTTP एक पैराग्राफ में

HTTP एक request और response वाला protocol है। ब्राउज़र, जिसे तकनीकी भाषा में user agent कहते हैं, सर्वर को एक request भेजता है। सर्वर उसके जवाब में पेज या फ़ाइल लौटाता है। बातचीत हमेशा ब्राउज़र शुरू करता है, सर्वर कभी नहीं। HTTP stateless भी है, यानी हर request अपने आप में अलग मानी जाती है। HTTPS में यही request और response TLS से एन्क्रिप्ट होकर जाते हैं, इसलिए रास्ते में कोई उन्हें पढ़ या बदल नहीं सकता। अगर आप सर्वर चलाते हैं और headers या status codes तक जाना चाहते हैं, तो HTTP क्या है और सर्वर पर यह कैसे काम करता है पढ़िए।

एक उदाहरण पता: URL के हिस्से कौन-कौन से हैं?

यह पता हमने सिर्फ़ समझाने के लिए बनाया है:

https://www.example.com/learn/url-guide?lang=hi&page=2#faq

example.com किसी कंपनी का डोमेन नहीं है। RFC 2606 नाम के इंटरनेट मानक ने example.com, example.net और example.org को उदाहरणों के लिए आरक्षित (reserved) रखा है। इसी मानक में .test और .example जैसे TLD भी आरक्षित हैं। इसलिए नीचे के सारे उदाहरण इन्हीं नामों पर बने हैं।

अब इस पते को बाएँ से दाएँ तोड़ते हैं:

  • https: scheme। यह ब्राउज़र को बताता है कि कौन-सा protocol इस्तेमाल करना है।
  • ://: scheme को बाकी पते से अलग करने वाला निशान।
  • www: subdomain।
  • example: वह नाम जो किसी ने रजिस्टर किया है।
  • .com: TLD (top-level domain), यानी सबसे दाहिना हिस्सा।
  • पोर्ट: इस पते में दिख नहीं रहा, पर मौजूद है। https के लिए यह 443 है।
  • /learn/url-guide: path, यानी सर्वर पर कौन-सा पेज चाहिए।
  • ?lang=hi&page=2: query, यानी सर्वर के लिए अतिरिक्त जानकारी।
  • #faq: fragment, यानी पेज के अंदर कौन-सी जगह।

हर हिस्से को थोड़ा और खोलकर देखते हैं।

scheme: https या http

URL का पहला हिस्सा scheme है। यह बताता है कि ब्राउज़र किस protocol से पेज माँगे। वेबसाइटों के लिए यह आमतौर पर https होता है, या उसका बिना एन्क्रिप्शन वाला रूप http। scheme के बाद :// आता है, और उसके बाद authority शुरू होती है। authority में डोमेन होता है, और ज़रूरत हो तो पोर्ट भी।

subdomain, डोमेन और TLD: नाम को दाएँ से बाएँ पढ़िए

डोमेन नेम बिंदुओं (dots) से अलग किए गए हिस्सों से बनता है, और उसे दाएँ से बाएँ पढ़ा जाता है। www.example.com में सबसे दाहिना com TLD है। उसके ठीक बाएँ वाला example second-level domain कहलाता है। यही वह नाम है जो किसी ने रजिस्टर किया है। जिसके पास कोई डोमेन है, वह उसके आगे अपनी मर्ज़ी से subdomain बना सकता है, जैसे www.example.com या help.example.com। इसीलिए बाईं तरफ़ लिखा नाम मालिक के बारे में कुछ साबित नहीं करता।

भारत में आप .in बहुत देखते हैं। .in एक TLD है, और उसके नीचे कई zone हैं, जैसे co.in, net.in, org.in, gov.in और ac.in। ऐसे पते में असली रजिस्टर किया गया नाम zone के ठीक बाएँ होता है। www.example.co.in में रजिस्टर किया गया नाम example.co.in है।

एक बात पर ध्यान दीजिए। .in रजिस्ट्री की नीति (अक्टूबर 2026 में देखी गई) के अनुसार .in, co.in, net.in और org.in जैसे खुले zone में दुनिया का कोई भी व्यक्ति नाम रजिस्टर कर सकता है, बिना किसी शर्त के। इसलिए .co.in देखकर यह मत मानिए कि साइट किसी रजिस्टर्ड कंपनी की है। इसके उलट gov.in, ac.in, edu.in, res.in और mil.in जैसे zone भारत की योग्य संस्थाओं के लिए आरक्षित हैं।

पोर्ट: 80 और 443, जो पते में नहीं दिखते

पोर्ट एक नंबर है जिससे एक ही सर्वर पर चल रही अलग-अलग सेवाएँ पहचानी जाती हैं। HTTP का डिफ़ॉल्ट पोर्ट 80 है और HTTPS का 443। जब सर्वर यही डिफ़ॉल्ट पोर्ट इस्तेमाल करता है, तो पते में पोर्ट लिखने की ज़रूरत नहीं होती। इसलिए आप उसे लगभग कभी नहीं देखते। अगर सर्वर किसी और पोर्ट पर चल रहा है, तो पोर्ट लिखना ज़रूरी है, जैसे http://www.example.com:8080/। डोमेन और पोर्ट के बीच कोलन (:) आता है। पोर्ट क्या होते हैं और सर्वर पर उन्हें कैसे देखें, यह Linux पर पोर्ट क्या होते हैं में विस्तार से है।

path: सर्वर पर कौन-सा पेज

/learn/url-guide path है। यह बताता है कि सर्वर पर कौन-सा संसाधन (resource) चाहिए। वेब के शुरुआती दिनों में path अक्सर सर्वर पर किसी असली फ़ाइल की जगह होता था। आज ज़्यादातर यह सिर्फ़ एक नाम है, जिसे वेब सर्वर अपने तरीके से समझता है। path पहले ? या # पर, या पते के अंत में, ख़त्म होता है।

query: सवाल-चिह्न के बाद की जानकारी

पहले ? से query शुरू होती है। इसमें key=value जोड़े होते हैं, जो & से अलग किए जाते हैं। हमारे उदाहरण में दो जोड़े हैं: lang=hi और page=2। सर्वर इनका इस्तेमाल पेज लौटाने से पहले कुछ अतिरिक्त काम करने के लिए कर सकता है, जैसे भाषा चुनना या दूसरा पेज दिखाना। query # पर या पते के अंत में ख़त्म होती है।

fragment: # के बाद वाला हिस्सा सर्वर तक नहीं जाता

# के बाद वाला हिस्सा fragment कहलाता है। यह ब्राउज़र के पास ही रहता है और request के साथ सर्वर को कभी नहीं भेजा जाता। ब्राउज़र इसका इस्तेमाल पेज के अंदर किसी हिस्से तक पहुँचने के लिए करता है। हमारे उदाहरण में #faq पेज के FAQ वाले हिस्से की तरफ़ इशारा करता है।

SMS में आए लिंक का असली डोमेन कैसे पहचानें?

यह सबसे काम का हिस्सा है। किसी लिंक की बाईं तरफ़ कोई भी नाम लिखा जा सकता है। जो व्यक्ति पता बाएँ से पढ़ता है, वह वही नाम देखकर भरोसा कर लेता है। असली डोमेन पते के बाईं तरफ़ नहीं, बल्कि host वाले हिस्से के दाहिने छोर पर होता है।

host वाला हिस्सा :// के बाद शुरू होता है और अगले /, ? या # पर ख़त्म होता है। यानी असली डोमेन :// और उसके बाद आने वाले पहले अकेले / के बीच कहीं है। इसे ढूँढने के चरण:

  1. पते में :// ढूँढिए और उसके ठीक बाद से पढ़ना शुरू कीजिए।
  2. आगे बढ़ते हुए पहला /, ? या # ढूँढिए। वहीं host ख़त्म होता है। उसके बाद का सब कुछ path, query या fragment है।
  3. अगर इस हिस्से में @ है, तो @ से पहले का सब कुछ हटा दीजिए। URL के नियमों में @ से पहले वाला हिस्सा username माना जाता है, साइट का नाम नहीं।
  4. अगर अंत में : और कोई नंबर है, तो वह पोर्ट है। उसे भी हटा दीजिए।
  5. अब बचे हुए नाम को दाएँ से बाएँ पढ़िए। सबसे दाहिना हिस्सा TLD है। उसके ठीक बाएँ वाला लेबल असली मालिक का नाम है। .co.in या .gov.in जैसे zone में, zone के ठीक बाएँ वाला लेबल देखिए।

एक नकली KYC SMS को पढ़कर देखिए

मान लीजिए आपके बैंक की असली वेबसाइट www.example.com है। अब आपको यह SMS आता है:

प्रिय ग्राहक, आपका KYC अधूरा है। आज रात आपका खाता बंद हो जाएगा।
अभी अपडेट करें: https://www.example.com.kyc-update.test/verify?ref=8841

लिंक में बैंक का नाम सबसे पहले दिख रहा है, इसलिए यह असली लगता है। अब नियम लगाइए। :// के बाद पहला / आने तक का हिस्सा www.example.com.kyc-update.test है। इसे दाएँ से पढ़िए: test TLD है, और उसके बाएँ kyc-update है। यानी असली डोमेन kyc-update.test है। www.example.com यहाँ सिर्फ़ उस डोमेन का subdomain है, जिसे kyc-update.test का मालिक अपनी मर्ज़ी से कुछ भी लिख सकता है। यह लिंक बैंक का नहीं है।

दूसरी चाल @ वाली है:

https://www.example.com@secure-login.test/kyc

यहाँ host वाला हिस्सा www.example.com@secure-login.test है। @ से पहले का www.example.com username है। असली host secure-login.test है।

ये दोनों उदाहरण आरक्षित नामों पर बने हैं। असली धोखाधड़ी वाले SMS में नाम ज़्यादा असली दिखेंगे, पर पढ़ने का नियम वही रहेगा। सबसे सुरक्षित आदत यह है: बैंक से जुड़ा कोई काम SMS के लिंक से मत कीजिए। बैंक का पता ख़ुद टाइप कीजिए, या बैंक की आधिकारिक ऐप खोलिए।

किसी सरकारी पोर्टल का पता कैसे जाँचें?

भारत सरकार की साइटें आमतौर पर .gov.in पर होती हैं। यह zone खुला नहीं है। registry.gov.in के FAQ के अनुसार GOV.IN के लिए NIC (National Informatics Centre) अकेला registrar है। वहाँ के रजिस्ट्रेशन दिशानिर्देश बताते हैं कि यह नाम भारत सरकार और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, विभागों और उनसे जुड़ी संस्थाओं जैसे सरकारी निकायों के लिए है। उन्हीं दिशानिर्देशों के अनुसार बैंक और वित्तीय संस्थाएँ, सरकारी बैंक भी, सामान्य रूप से .gov.in के योग्य नहीं हैं, जब तक भारत सरकार किसी अपवाद में मंज़ूरी न दे। शिक्षा और शोध संस्थानों को edu.in, res.in या ac.in पर भेजा जाता है। ये बातें अक्टूबर 2026 में registry.gov.in पर देखी गई हैं। पूरी और ताज़ा सूची वहीं देखिए।

जाँचने का तरीका वही दाएँ से बाएँ वाला नियम है। host के आख़िरी दो हिस्से ठीक gov और in होने चाहिए, और उनके बाद कुछ नहीं। ये दोनों नकली पते देखिए:

https://gov.in.example.com/scheme
https://pm-yojana-gov-in.test/apply

पहले पते में gov.in बाईं तरफ़ है, पर दाएँ से पढ़ने पर डोमेन example.com निकलता है। दूसरे पते में gov-in एक शब्द का हिस्सा भर है, और TLD .test है। दोनों में से कोई भी .gov.in साइट नहीं है।

और पक्का करना हो, तो registry.gov.in पर दिया गया WHOIS query इस्तेमाल कीजिए। रजिस्ट्री के FAQ के अनुसार किसी .gov.in डोमेन की जानकारी WHOIS से जाँची जा सकती है, और वहाँ दिखने वाली creation date वह तारीख़ है जिस दिन डोमेन चालू हुआ।

URL, डोमेन, वेबसाइट और IP एड्रेस में क्या फ़र्क है?

ये चारों शब्द अक्सर एक-दूसरे की जगह बोले जाते हैं, पर इनका मतलब अलग है:

  • URL: किसी एक पेज या फ़ाइल का पूरा पता, scheme से fragment तक। उदाहरण: https://www.example.com/learn/url-guide?lang=hi#faq।
  • डोमेन नेम: URL का एक हिस्सा, जो authority के अंदर आता है। उदाहरण: example.com। एक डोमेन के नीचे हज़ारों URL हो सकते हैं।
  • वेबसाइट: किसी डोमेन या subdomain पर रखे पेजों का पूरा समूह। www.example.com पर जो कुछ भी है, वह एक वेबसाइट है।
  • IP एड्रेस: नंबरों वाला पता जिससे इंटरनेट पर सर्वर तक पहुँचा जाता है, जैसे 192.0.2.172। IP एड्रेस याद रखना मुश्किल होता है और वह बदल भी सकता है। इसीलिए हम डोमेन नेम इस्तेमाल करते हैं।

डोमेन और IP को जोड़ने का काम DNS (Domain Name System) करता है। जब आप कोई पता खोलते हैं, तो आपका कंप्यूटर एक DNS सर्वर से पूछता है कि इस डोमेन का IP एड्रेस क्या है। यह पूरी प्रक्रिया DNS क्या है और डोमेन IP एड्रेस में कैसे बदलता है में समझाई गई है। URL में डोमेन की जगह सीधे IP एड्रेस भी लिखा जा सकता है, पर ऐसा कम होता है, क्योंकि यह याद रखने में असुविधाजनक है।

एड्रेस बार में Not secure का क्या मतलब है?

Chrome पते के बाईं तरफ़ एक सुरक्षा निशान दिखाता है। जो साइट निजी (private) कनेक्शन इस्तेमाल नहीं करती, उसके लिए यह Not secure बताता है। Chrome Help के अनुसार ऐसी साइट पर भेजी और पाई गई जानकारी को कोई और देख या बदल सकता है। ऐसे पेज पर पासवर्ड या कार्ड नंबर जैसी निजी जानकारी मत डालिए। इसे सिर्फ़ साइट का मालिक ठीक कर सकता है, साइट पर HTTPS लगाकर। किसी http लिंक को खोलने में असल जोखिम कितना है, यह क्या http लिंक खोलना सुरक्षित है में बताया गया है।

ध्यान रखिए कि यह लेबल कनेक्शन के बारे में बताता है। डोमेन किसका है, यह आपको ऊपर वाले दाएँ से बाएँ नियम से ख़ुद पढ़ना होगा। अगर आप अपनी वेबसाइट चलाते हैं और यह लेबल हटाना चाहते हैं, तो अपने सर्वर पर HTTP और HTTPS का फ़र्क से शुरू कीजिए।

FAQ

वेब एड्रेस में HTTP का क्या अर्थ है?

HTTP का पूरा नाम Hypertext Transfer Protocol है। ये वे नियम हैं जिनसे ब्राउज़र किसी सर्वर से पेज माँगता है और सर्वर जवाब में पेज लौटाता है। HTTPS में S का मतलब Secure है: वही बातचीत TLS से एन्क्रिप्ट होकर होती है।

URL और डोमेन नेम में क्या अंतर है?

डोमेन नेम URL का एक हिस्सा है। https://www.example.com/learn?lang=hi एक URL है, और उसमें example.com डोमेन है। URL किसी एक पेज का पूरा पता है, जबकि डोमेन बताता है कि वह पेज किस नाम के नीचे है। एक डोमेन के नीचे बहुत सारे URL हो सकते हैं।

क्या URL में # के बाद वाला हिस्सा सर्वर तक जाता है?

नहीं। # के बाद वाला हिस्सा fragment कहलाता है। ब्राउज़र उसे अपने पास रखता है और request के साथ सर्वर को नहीं भेजता। ब्राउज़र इसका इस्तेमाल पेज के अंदर किसी ख़ास हिस्से पर पहुँचने के लिए करता है।

क्या .co.in वाली साइट किसी रजिस्टर्ड कंपनी की होती है?

ज़रूरी नहीं। .in रजिस्ट्री की नीति के अनुसार co.in एक खुला zone है, जिसमें दुनिया का कोई भी व्यक्ति बिना किसी शर्त के नाम रजिस्टर कर सकता है। इसलिए .co.in अपने आप में भरोसे का निशान नहीं है। साइट किसकी है, यह zone के ठीक बाएँ वाले नाम से पढ़िए।

कैसे पता करें कि कोई लिंक सच में .gov.in सरकारी साइट का है?

:// के बाद पहला / आने तक का हिस्सा लीजिए और उसे दाएँ से बाएँ पढ़िए। उसके आख़िरी दो हिस्से ठीक gov और in होने चाहिए। gov.in.example.com जैसा पता example.com का है, सरकार का नहीं। ज़्यादा पक्का करने के लिए registry.gov.in पर दिया गया WHOIS query इस्तेमाल कीजिए, जो डोमेन की जानकारी और उसके चालू होने की तारीख़ दिखाता है।

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